Wednesday, August 17, 2011

प्‍यार के मौत


दूरियो के दौर में,
मजबूरियाँ नज़र आती है।
तेरे चाहत की तनहाई मे,
तेरी परछाई नज़र आती है।।

मजबूरी को समझ सको तो,
इश्‍क समझना असां होगा।
मतभेद दिखा कर दूरी हमसे,
हमें हटना आसां होगा।।

हम हट जायेगे मिट जायेगे,
यादो की कश्‍ती टूट जायेगी।
टूटा तागा जुड जाता है,
पर गांठ हृदय को चुभ जाती है।

इश्‍क की गहराई हमे मालूम नही,
नापने इश्‍क की गहराई को हम।
डूबना चाहते थे सागर मे ,
पर सागर को अपने गहराई का अभिमान था।।

सागर के अपने अभिमान से,
प्‍यार की गहराई मे मौत हो गई।
प्‍यार के मौत की पीड़ा आँसू,
सागर मे मिल मीत बन गई।।

सागर को अभिमान बड़ा कि,
प्‍यार तो उसकी गहराई मे है।
मार कर प्‍यार को सागर ने,
नष्‍ट किया उसकी तरूणाई को।।

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