काश के इन्सान ……!!
काश- के -इन्सान
पंछी सा होता …..
उड़ जाता पंख फैलाकर चाहे जहाँ
चाहे जहाँ जाना होता ………………
न जरुरत होती बड़े से घर की
बस एक छोटे से घोसले में रह लेते
पेटीज , बर्गर , चाउमीन, चिप्स कुरकुरे कुछ न होते
बस चावल के दानो से अपना पेट भर लेते
न cold drinks न bislari ka pani
बस talab ka pani होता
काश के इन्सान ………..
न padhne की tansion होती
घर ka kam न karna होता
jite jindgi uchhal kud kr
कहीं kisi ka dar न होता
काश के इन्सान …………….
kabhi desh में mahngai न होती
न कहीं bharshtachar ही होता
नफरत की कोई दीवार न होती
सारी दुनिया में बस प्यार ही प्यार होता
काश- के- इन्सान …………………
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