Sunday, March 17, 2013

ना रहींम ना राम आया

ना रहींम ना राम आया

ना रहींम आया और ना राम आया
ये अकेलापन ही आखिर मेरे काम आया

पुकारा जब भी जरूरत में मैंने
ना कोई दुआ दिखी ना कोई सलाम आया

काफिलों में चला था मैं हमेशा
मगर तनहा दिखा जब भी कोई मुकाम आया

आया नही जवाब गर किसीका नाम पुकारा
बस दीवारों से टकराकर वापस हर एक नाम आया

ज़िन्दगी गुज़री है महफिलों में मैंने
फिर भी उस भीड़ में हर पल खुद को तनहा पाया

उजालों में बड़े साथी हुआ करते थे मेरे
अँधेरा क्या हुआ न साथी रहे न मेरा साया

तडपता था दिल के तू तनहा क्यों हैं
ये तन्हाई ही तेरी ताकत है मैं दिल को समझाया

ना रहींम आया और ना राम आया
ये अकेलापन ही आखिर मेरे काम आया

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