Friday, February 15, 2013

अजीब मौत

खुद से टकराया
गिरा
और मर गया
मौत अजीब थी
लेकिन
आगे की दास्तां और भी अजीब थी
अपनी ही लाश के पास बैठा
वो शख़्स देर तक
फूट-फूटकर रोता रहा...रोता रहा
और जब थक गया
तो
उसका जनाज़ा सजाने लगा
फिर कब्र खोदी
और ख़ुद की लाश को
दफ़न कर दिया
आंखों में सूनापन लिए
भटक रहा है
इसी शहर में
कभी-कभी शहर का शोर
उसके जेहन तक उतरता हो शायद
और धीरे-धीरे
उसकी आंखों से निकला सूनापन
शहर में फैलता जा रहा है
नतीज़ा किसको पता है?
हां कुछ लोग
ज़रूर ख़ुद से टकरा रहे हैं
हां कुछ वैसे ही मरे जा रहे हैं
और अपने कंधों पर
अपनी लाशों को उठाए
शहरवालों की तादाद
गुजरते दिन के साथ
बढ़ती जा रही है
धीरे-धीरे
सूनापन
बढ़ता जा रहा है
जेहन में....शहर में... हर कहीं
कहते हैं...
दुनिया बदल रही है......

No comments:

Post a Comment