आज मरने के अट्ठारह साल बाद
बाबा, भईया को सपना दिखाए हैं
कि नहीं मिल रहा आजकल उनको
टाईम से खाना पानी….
उस सपने को 1 साल हो गया है
तब से माँ, जग जाती है रोज सबेरे
बिना नागा
चढ़ाती है बाबा की फोटो पर फूल
बना के पहली रोटी
रख देती है, तुलसी के चौरा पर
चिरई कऊआ के खाने के लिए
बाबूजी गाँव के पच्छिम वाले पीपल पर फिर से कलसा टांग आए हैं...
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