Monday, September 10, 2012

धर्म का मायाजाल

धर्म का मायाजाल

mukesh chandra

  धर्म भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा रहा है। आम हो या खास, हर इंसान की धर्म में गहरी आस्था है। भगवान ही नहीं, हमारी आस्था पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों में भी है। तभी तो हम मानते हैं कि गाय और पीपल के पत्ते में हमारे 84 करोड़ देवी-देवताओं का वास है। दिन की शुरूआत हम ईश्वर की प्रार्थना से करते हैं और रात्रि में भगवान को धन्यवाद देकर बिस्तर पर सोने पहुंचते हैं कि उनकी कृपा से दिन अच्छा बीता। लेकिन धार्मिक होने की इसी वजह ने इसे अंधविश्वासी लोगों की दुनिया में भी बदल दिया है। साधु-संतों के पीछे लंबी लाइनें लगती हैं, आस्था में डूबे उनके लाखों श्रद्धालु अपने श्रद्धेय के एक इशारे पर कुछ भी कर डालने को उतारू हो जाते हैं। हाल यह है कि अगर कोई गरीब है और भोजन की भी बमुश्किल जुगाड़ कर पाता है, वह भी धर्म के नाम पर कुछ भी देने-करने को तैयार हो जाता है। धर्म और बाबाओं के नाम पर भारत में किसी को लूटना सबसे आसान है। इसी आस्था का दुरुपयोग करते हुए यहां के बाबाओं ने भगवान के नाम का सहारा लेकर कई बार बाबाओं और ऋषियों के पवित्र कार्यों को अपमानित किया है। कुछ समय पहले एक बाबा के सेक्स रैकेट चलाने का मामला सामने आया था। हर तरह के अपराधों में इनमें से कुछ बाबाओं की लिप्तता पाई जाती रही है। कुछ बाबा तो काले धन को सफेद करने का अवैध कारोबार संचालित कर रहे हैं।  हालांकि यह भी सच है कि सभी बाबा इस तरह के नहीं। कइयों का आचरण बेहद शुद्ध है और वह अपने भक्तों के कल्याण में समर्पित हैं। कई बार बाबाओं का नाम लेकर कई गैरसामाजिक लोग इस पवित्र जिम्मेदारी को दूषित करते हैं। धर्म के कारोबारी सरीखे बाबाओं के पास इतना धन है जितना कोई सोच भी नहीं सकता। हाल ही में ब्रह्मलीन हुए बाबा जय गुरुदेव की अकूत संपत्ति से फिर अनुमान लगा कि बाबाओं के पास कितनी दौलत है। पिछले दिनों पुट्टापर्थी के साईं बाबा का भी बड़ा खजाना था। कहा जाने लगा है कि पढ़ना-लिखना बेकार है, अच्छा है बाबा बन जाना। जिस देश में इंजीनियर  और अन्य पढ़े-लिखे बेरोजगार हों, यह बात गलत नहीं लगती। 

प्रस्तुत है करोड़-अरबपति बाबाओं पर मुकेश चंद्र श्रीवास्तव की एक रिपोर्ट—


माता अमृतानंदमयी

जादू की झप्पी से आध्यात्मिक अनुभूति और स्नेह बांटने वाली को उनके भक्त प्रेम से अम्मा कहकर पुकारते हैं। समर्थक कहते हैं कि माता का निश्छल प्रेम उन्हें सभी आध्यात्मिक नेताओं से अलग करता है। 27 सितम्बर, 1953 को केरल के एक छोटे से गांव आल्लपाड में एक गरीब मछुआरे परिवार में जन्मी माता अमृतानंदमयी एक गरीब परिवार से हैं. अम्मा जब छ: माह की हुईं तभी इन्होंने बोलना व चलना सीख लिया था और तीन वर्ष की होते-होते भक्तिगीत गाना भी। धीरे धीरे माता अमृतानंदमयी लोगों के बीच लोकप्रिय होती गईं। माता अमृतानंदमयी ने 1987 से अपने अनुयायियों के अनुग्रह पर देश-विदेश के आयोजनों में शामिल होना शुरू किया। देश-विदेश के विभिन्न संगठनों में हिस्सा लेनी वाली माता अमृतानंदमयी ने माता अमृतानंदमयी मठ, माता अमृतानंदमयी सेंटर, अम्मा-यूरोप, अम्मा-जापान, अम्मा-केन्या, अम्मा-आॅस्ट्रेलिया आदि की स्थापना की है। यह सभी संगठन संयुक्त रूप से एम्ब्रेसिंग द वर्ल्ड के रूप में जाने जाते हैं। एक अनुमान के अनुसार मां अमृतानंदमयी की दौलत करीब 400 करोड़ की है। माता अमृतानंदमयी को बड़ी मात्रा में अनुयायियों से दान में धन मिलता है।

राम रहीम

सन्त गुरमीत राम रहीम सिंह को उनके भक्त भगवान मानते हैं। डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक संत गुरमीत राम रहीम सिंह भी कुख्यात बाबाओं की सूची में शामिल किए जाते हैं। कभी सिखों के गुरु की हत्या तो कभी बलात्कार जैसे मामलों में लिप्त होने तक के उन पर आरोप लगे हैं। पंद्रह अगस्त, 1967 को राजस्थान के गंगानगर में जन्मे राम रहीम के माता-पिता संत शाह सतराम जी के भक्त थे। 23 सितम्बर, 1990 को संत शाह सतराम जी ने घोषणा की कि गुरमीत राम रहीम सिंह ही उनके आध्यात्मिक कार्यों को आगे बढ़ाएंगे और तब से गुरमीत राम रहीम सिंह ने देश में अपनी शिक्षा देनी शुरू कर दी। संत गुरुमीत राम रहीम की संपत्ति करीब 300 करोड़ से भी ज्यादा है। जगह-जगह सत्संगों के अलावा माना जाता है कि काफी धन इनके पास गैर-कानूनी तरीके से भी इकठ्ठा किया गया है।

ईसाई धर्मगुरु पाल दिनाकरण

 पाल दिनाकरण का कृपा कारोबार आजकल चर्चा में है। बिजनेस ब्लेसिंग नामक इस कारोबार से वह लोगों से धन लेते हैं। अगर आप कोई बिजनेस शुरू करना चाहते हैं या अपने बिजनेस पर कृपा चाहते हैं तो अलग से पैसे दीजिए, आपको कृपा मिल जाएगी। वह 2008 में अपने पिता की बनाई गई कारुण्या यूनिवर्सिटी और जीसस कॉल्स नामक संस्था के सर्वेसर्वा हैं। पॉल दिनाकरन अपने प्रवचनों से ईसा मसीह की कृपा बरसाने का दावा करते हैं और इस काम में उनके परिवार के बाकी सदस्य भी शामिल हैं। ईसा मसीह की महिमा गाते-गाते पॉल ने लाखों लोगों को क्रिश्चियन बनने के लिए भी प्रेरित किया है। पॉल दिनाकरन का सालाना टर्नओवर पांच हजार करोड़ से ज्यादा का है। वह भारत सरकार की अल्पसंख्यक शिक्षा संबंधी निगरानी समिति के सदस्य भी हैं। पॉल का एक 24 घंटे का चैनल रेनबो भी है जिसके जरिए उनकी सभाओं का प्रसारण करीब नौ देशों के टीवी चैनलों पर होता है। पॉल जीसस काल्स मिनिस्ट्री के नाम पर मैरिज ब्यूरो, जॉब ब्यूरो और अन्य कार्य भी करते हैं। पॉल की वेबसाइट पर आॅनलाइन डोनेशन की मांग की जाती है।

श्रीश्री रविशंकर 

श्रीश्री रविशंकर आध्यामिक नेता एवं मानवतावादी धर्मगुरु हैं। श्री रविशंकर चार साल की उम्र में ही भगवदगीता के श्लोकों का पाठ कर लेते थे। बचपन में ही उन्होंने ध्यान करना शुरू कर दिया था. रविशंकर लोगों को सुदर्शन क्रिया सिखाते हैं। इसे सिखाने के कोर्स की फीस हर देश में अलग-अलग है। इसके बारे में वो कहते हैं कि 1982 में दस दिवसीय मौन के दौरान कर्नाटक के भद्रा नदी के तीरे लयबद्ध सांस लेने की क्रिया एक कविता या एक प्रेरणा की तरह उनके जेहन में उत्पन्न हुई। उन्होंने इसे सीखा और दूसरों को सिखाना शुरू किया। 1982 में श्रीश्री रविशंकर ने आर्ट आफ लिविंग की स्थापना की। यह शिक्षा और मानवता के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य करती है। उन्होंने 1997 में इंटरनेशनल एसोसियेशन फार ह्यूमन वैल्यू की स्थापना की जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर उन मूल्यों को फैलाना है जो लोगों को आपस में जोड़ती हैं। श्री श्री रविशंकर की संपत्ति 500 करोड़ से भी ज्यादा की है। आरोप उन पर भी हैं कि वह सत्ता के मददगार का काम करते हैं।

निर्मल बाबा

 बाबा जी, मुझे गाड़ी दिला दीजिए.. बाबा जी मैंने जो विश मांगी है, वह भी पूरी कर दीजिए.. बाबा जी मेरा वर्क टार्गेट पूरा करने का आशीर्वाद दें.. बाबा जी मेरी परीक्षा चल रही है, अच्छे मार्क्स दिला दें.. मुझे अच्छा घर दिला दें.. अच्छी नौकरी दिला दें.. रितू से शादी करा दें.. देश के 36 चैनलों पर सिर्फ एक व्यक्ति से यह इच्छा पूरी करने को कहा जा रहा हैै, वह हैं निर्मल बाबा। निर्मलजीत सिंह नरूला नामक यह व्यक्ति निर्मल बाबा कैसे बना, यह आज भी रहस्य है। निर्मल बाबा की आय के दो स्रोत हैं, पहला निर्मल दरबार के समागम में भाग लेने के लिए निबंधन शुल्क और दूसरा दसवंद। निबंधन शुल्क दो हजार रुपये प्रति व्यक्ति (दो वर्ष से ऊपर के भक्त का भी पूरा पैसा) लगता है जबकि दसवंद (इसकी राशि पूर्णिमा के पहले जमा करनी होती है) है अपनी आय का 10वां हिस्सा। बाबा विभिन्न शहरों में अकूत संपत्ति के मालिक हैंऔर खुद स्वीकार करते है कि 259 करोड़ की संपत्ति उनके पास है। हालांकि अनुमान तो कई गुना और का है। उनके विरुद्ध कई मामलों में जांच शुरू हुई है।

बाबा रामदेव

योग   गुरू के नाम से प्रसिद्ध बाबा रामदेव की दिलचस्पी आजकल देश की राजनीति में बढ़ गई है। वह विदेशों में जमा काले धन को भारत वापस मंगाने के लिए अभियान चलाए हुए हैं। हालांकि उनकी अकूत संपत्ति भी चर्चित रही है। पिछले वित्त वर्ष में बाबा रामदेव ने दिव्य योग मंदिर और पतंजलि योगपीठ का कुल टर्नओवर 1100 करोड़ रुपए था। इसके अलावा भी बाबा के कई प्रोजेक्ट हैं जिनपर करोड़ो रुपया लगा है। बाबा की हरिद्वार में दिव्य फामेर्सी से हर साल 50 करोड़ रुपए की आय होती है। बाबा रामदेव का 500 करोड़ की लागत से फूड पार्क भी आमदनी का अच्छा स्रोत बनने वाला है। बाबा रामदेव हर साल योग कैंप लगाते हैं जिससे हर साल कुल 25 करोड़ रुपए की कमाई होती है। इस कैंप में कुल 50,000 लोग शिरकत करते हैं और हर व्यक्ति 5,000 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस देता है। हर साल बाबा रामदेव की किताबों और सीडी की बिक्री से 2-3 करोड़ रुपए कमाई होती है। बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के नाम 34 कंपनियां है जिनका टर्नओवर 265 करोड़ रुपए हैं। सरकार की ओर से लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, बालकृष्ण उत्तराखंड में पंजीकृत 23 कंपनियों के निदेशक हैं जिनका कारोबार 94.84 करोड़ रुपए है। इसके अलावा बालकृष्ण के नाम 5 कंपनियां उत्तरप्रदेश में पंजीकृत है जिनका कुल व्यापार 5 लाख रुपए है और 4 कंपनियां दिल्ली में रजिस्टर्ड हैं जिनका कुल कारोबार 163.06 करोड़ रुपए है जबकि पश्चिम बंगाल में भी एक कंपनी है जिसका कुल व्यापार 8 करोड़ रुपए है। इसके अलावा बालकृष्ण महाराष्ट्र की एक कंपनी में भी निदेशक हैं लेकिन इसके कारोबार के बारे में कोई जानकारी नहीं है। रामदेव भी कई जांच में फंसे हुए हैं।

बाबा जय गुरुदेव

 हाल ही में ब्रह्मलीन हुए बाबा जय गुरुदेव 12 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का साम्राज्य छोड़ गए हैं। बाबा टाट के वस्त्र धारण करने की नसीहत देते थे, लेकिन उनकी संपत्ति से ठाठ का अंदाज लगाया जा सकता है। बाबा के ट्रस्ट के मथुरा में आधा दर्जन से ज्यादा बैंक शाखाओं में खाते और एफडी हैं। एसबीआइ मंडी समिति ब्रांच के चालू खाते में एक अरब रुपए जमा हैं। कई अरब रुपए की एफडी भी हैं। अचल संपत्ति में ज्यादातर मथुरा-दिल्ली हाईवे पर एक तरफ साधना केंद्र से जुड़ी जमीनें हैं, तो दूसरी तरफ बाबा का आश्रम है। तीन सौ बीघे जमीन पर एक आश्रम इटावा के पास खितौरा में बन रहा है। ट्रस्ट के पास चार हजार एकड़ से ज्यादा जमीन है। जय गुरुदेव के ट्रस्ट के नाम से मथुरा में स्कूल और पेट्रोल पंप भी हैं। बाबा के आश्रम में दुनिया की सबसे महंगी गाड़ियों का लंबा काफिला है। इसमें पांच करोड़ से ज्यादा कीमत की लिमोजिन गाड़ी भी है। करोड़ों की प्लेमाउथ, ओल्ड स्कोडा, मर्सडीज बेंज और बीएमडब्ल्यू सहित तमाम गाड़ियों की कीमत 150 करोड़ के आसपास है।

महर्षि महेश योगी 

 विश्व के 150 देशों में भारत और यहां की संस्कृति का रुतबा कायम करवाने वाले महर्षि महेश योगी ने टीएम तकनीक से शिक्षा देकर विश्व को चकित कर दिया था। 12 जनवरी, 1918 को छत्तीसगढ़ में जन्मे महेश योगी का मूल नाम महेश प्रसाद वर्मा था। उन्होंने तेरह वर्ष तक ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती के सानिध्य में शिक्षा ग्रहण की। महर्षि महेश योगी ने शंकराचार्य की मौजूदगी में रामेश्वरम में 10 हजार बाल ब्रह्मचारियों को आध्यात्मिक योग और साधना की दीक्षा दी। हिमालय क्षेत्र में दो वर्ष का मौन व्रत करने के बाद सन् 1955 में उन्होंने टीएम तकनीक की शिक्षा देना आरम्भ की। देश से अधिक वह विदेश में लोकप्रिय थे। नीदरलैंड में तो उनके द्वारा बनाई गई मुद्रा राम का चलन भी है। नीदरलैंड की डच दुकानों में एक राम के बदले दस यूरो मिल सकते हैं। ग्लोबल कंट्री आॅफ वर्ल्ड पीस के पास इतनी संपत्ति है जितना भारत के एक राज्य की वार्षिक कमाई। 250 अरब की संपत्ति के मालिक महर्षि महेश योगी कई कामों में पैसा लगाते थे जैसे शिक्षा और प्रॉपर्टी। उनके पास जो बेशुमार दौलत है उसमें से ज्यादातर पैसा धर्म के नाम पर ही कमाया गया है। योगी पर आरोप है कि शिक्षा के क्षेत्र में उनके साम्राज्य में दलाली की राशि की बड़ी भूमिका है।

जयेन्द्र सरस्वती 

 आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित प्राचीन मठ कांची कामकोटि के शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती देश के सबसे अमीर बाबाओं में गिने जाते हैं। संपत्ति और धार्मिक वजह से ज्यादा कांची कामकोटि के शंकराचार्य देश में अपनी राजनैतिक पकड़ के लिए जाने जाते हैं।
चाहे कांग्रेस हो या भाजपा या कोई अन्य दल, उनके बीच वार्ता के लिए शंकराचार्य ने कई बार मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। वैसे भी हमारे देश में शंकराचार्यों की भूमिका हमेशा अहम रही है और कांची कामकोटि के शंकराचार्य की राजनैतिक भूमिका तो बहुत अहम है। जयेंद्र सरस्वती ने एक समय में बाबरी मस्जिद विवाद को हल करने में अगुआई की थी। जयेंद्र सरस्वती कई ट्रस्टों के मालिक भी हैं जिसकी संपत्ति अगर आंकी जाए को कई करोड़ होगी।

ओशो रजनीश  

रजनीश चन्द्र मोहन एक विवादास्पद नए धार्मिक (आध्यात्मिक) आन्दोलन के लिए प्रसिद्ध हुए और भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका में रहे। ओशो के नाम से मशहूर रजनीश ने दुनिया को जीने का नया रास्ता दिखाया। भोग से योग का रास्ता दिखाने वाले वह अनोखे संत थे। उनका कहना था, भोग इतना कर लो कि मन तृप्त हो जाए और आप स्वत: योग की ओर आकर्षित हो जाएंगे। 11 दिसंबर, 1931 को मध्य प्रदेश में जन्मे ओशो रजनीश को कई लोग सेक्स गुरु के नाम से भी जानते हैं। ओशो   इंटरनेशनल फाउंडेशन की स्थापना कर उन्होंने अपनी शिक्षा को देश-विदेश में फैलाया। आज उनके भारत स्थित आश्रम में देश और विदेश से कई युवा आकर शरण लेते हैं तथा मनमाफिक जीवन जीते हैं। ओशो की दुनिया में सब मान्य है। ओशो  अब दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनके ट्रस्ट की संपत्ति हजारों करोड़ों रुपये में है। यह संपत्ति भारत ही नहीं, अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में है।

सत्य साईं बाबा

आन्ध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी गांव के एक आम मध्यमवर्गीय परिवार में 23 नवंबर, 1926 को जन्मे सत्यनारायण राजू ही आगे चलकर सत्य साईं बाबा बने। कहा जाता है कि 23 मई, 1940 को उनकी दिव्यता का लोगों को अहसास हुआ। सत्य साईं ने घर के सभी लोगों को बुलाया और चमत्कार दिखाने लगे। उन्होंने खुद को शिरडी वाले साईं बाबा का अवतार घोषित कर दिया। शिरडी के साईं बाबा, सत्य साईं की पैदाइश से आठ साल पहले ही ब्रह्मलीन हो चुके थे। खुद को शिरडी साईं बाबा का अवतार घोषित करने के बाद सत्य साई बाबा के पास श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। श्री सत्यसाईं ट्रस्ट की स्थापना कर सत्य साईं ने इसे दुनियाभर में फैला दिया। लोगों द्वारा धर्म के नाम पर सत्य साईं बाबा के पास इतना धन आने लगा जिसकी गिनती करना मुश्किल हो गया। 24 अप्रैल, 2011 को उनकी मृत्यु के पश्चात सत्य साईं बाबा ट्रस्ट के पास 40 हजार करोड़ की संपत्ति का आंकलन किया गया। यह वह धन है जो जनता के सामने खोला गया। अभी और ना जाने कितना धन पुट्टापर्थी की गुफाओं में गुम है। उनकी 400 करोड़ की संपत्ति थी। महाप्रयाण के बाद पता चला कि उनके यजुर मंदिर में 34.5 किलो सोना, 340 किलो चांदी और 1.90 करोड़ रुपए नकदी पड़ा था। बाबा के निधन के बाद मंदिर में जब पहली बार खजाने की खोज शुरू हुई तो 11.56 करोड़ रुपए, 98 किलो स्वणार्भूषण, 307 किलो चांदी के सामान मिले थे। वहां से मिले कुल संपत्ति का ब्यौरा अभी भी सार्वजनिक होना बाकी है। कहा जा रहा है कि सत्य साईं द्वारा छोड़ी गई कुल संपत्ति का मूल्य 40 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा है।

संत आशाराम बापू

 हमेशा विवादों में रहने वाले संत आसाराम बापू की छवि उनके भक्तों के बीच भगवान से भी ज्यादा है। भारत की सबसे ताकतवर शख्सियतों में से एक संत आसाराम बापू 17 अप्रैल, 1941 को जन्मे। उनके श्रद्धालुओं की संख्या देखते ही बनती है। विभाजित सिंध शहर में जन्मे संत आसाराम बापू के बचपन का नाम आसुमल शिरुमलानी था। वृंदावन के स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज से शिक्षा लेकर उन्होंने भक्ति की राह चुनी। आत्मबोध के लिए आसाराम बापू ने हिमालय की चोटी पर जाकर ध्यान किया और फिर देश में घूम-घूमकर सत्संग करने लगे। इनके सत्संगों से लोगों को मानसिक सुख मिलता है। देश-विदेश में आसाराम बापू ने 1300 से ज्यादा श्री योग वेदांत सेवा समितियों का गठन किया है। संत आसाराम बापू की वार्षिक कमाई का आंकड़ा 500 करोड़ के ऊपर है। वह साल में 15 करोड़ तो अपने सत्संग से ही कमा लेते हैं। आसाराम पर भी आरोप हैं, उनके पुत्र पर तो आश्रम में ही गलत कार्यों में लिप्त रहने का मामला उठा था।

मोरारी बापू 

वर्षों से देश में कथावाचक की भूमिका निभाने वाले मोरारी बापू धार्मिक गुरु हैं। अखंड रामायण और रामचरित मानस का पाठ करने वाले मोरारी बापू अपनी कथाओं में मुहावरों और शेरों का बखूबी प्रयोग करते हैं जिससे कथा रोचक हो जाती है। मोरारी बापू का जन्म 25 सितम्बर, 1946 के दिन महुआ के समीप तलगारजा (सौराष्ट्र) में वैष्णव परिवार में हुआ था। घर से स्कूल तक की 5 किलोमीटर की दूरी वह अपने दादा द्वारा रामायण सुनकर पूरी करते थे जिसकी वजह से उन्हें रामायण कंठस्थ हो गई थी। 14 वर्ष की आयु में मोरारी बापू ने पहली बार एक महीने तक रामायण का पाठ किया। इसके बाद से बापू देश-विदेश में रामायण की कथा का पाठ करने लगे। आज अमेरिका से लेकर केन्या और विश्व के कई अन्य देशों में मोरारी बापू रामायण का पाठ करते नजर आते हैं हालांकि इनके पास दुनिया भर में आश्रमों और ट्रस्ट का विशेष नेटवर्क नहीं है लेकिन फिर भी इनकी संपत्ति 300 करोड़ की आंकी जाती है जो इन्हें दान में मिली है।

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