Thursday, September 6, 2012

मोर और मोरनी




एक मोर था और एक मोरनी थी। दोनों दाने चुग रहे थे। इसी बीच वहां एक खेरा आया। खेरे को देखकर मोरनी ने कहा:

मैं ब्याती हूं जाल में,

मुझे डर किसका।

मोर तो बहुत सुन्दर है,

पर खेरा मेरे बस का।

यह कहकर मोरनी तो खेरे के साथ चली गई। मोर को बहुत बुरा लगा। उसने कहा, "मैं पक्षियों की पंचायत इकट्ठी करूंगा और उनसे न्याय करवाऊंगा।"

मोर चल पड़ा। रास्ते में उसे मुर्गा मिला।

मुर्गे ने पूछा, "मोर भैया, मोर भैया! कहां जा रहे हो?"

मोर ने कहा, "मोरनी खेरे के साथ चली गई है। पक्षियों की पंचायत बुलानी है। तुम भी आओगे न?"

मुर्गा बोला:

हम तो बड़-बड़ करते रहते हैं,

रंग हमारा भूरा है।

जबसे मोरनी गई है खेरे के घर,

खाया नहीं है हमने पेट भर।

मुर्गा मोर के साथ नहीं गया। मोर कुछ आगे बढ़ा तो उसे बया पक्षी मिला।

बया ने पूछा, "मोर भैया, मोर भैया! कहां जा रहे हो?"

मोर ने कहा, "मोरनी खेरे के साथ चली गई है। पक्षियों की पंचायत बुलानी है। तुम भी आओगे न?"

बया बोला:

हम तो बया कहलाते हैं,

कौन हमारी बराबरी कर सकता है?

जो अपनी औरत को बस में रखता है,

उसका कोई क्या बिगाड़ सकता है?

इसलिए भैया, मैं तो नहीं आऊंगा।"

उदास चेहरा लेकर मोर बेचारा आगे बढ़ा। रास्ते में उसे एक तीतर मिला।

तीतर ने पूछा, "मोर भैया, मोर भैया! कहां जा रहे हो?"

मोर ने कहा, "मोरनी खेरे के साथ चली गई हैं। पक्षियों की पंचायत बुलानी है। झगड़ा मिटाने के लिए तुम भी आ रहे हो न?"

तीतर बोला:

हम तो तीतर कहलाते हैं,

हमारे सिर पर बड़ा काम है।

मोर भैया, मुझे फुरसत नहीं है,

मुझे करने हैं मेरे बेटे के लगनां।

मोर भैया आगे बढ़े और बगुला भैया के पास पहुंचे।

बगुले ने पूछा, "मोर भैया, मोर भैया! कहां जा रहे हो?"

मोर ने कहा, "मोरनी खेरे के साथ चली गई है। पक्षियों की पंचायत बुलानी है। भैया, थोड़ा समय निकालकर तुम भी आओ न?"

बगुला बोला:

हम बगुला कहलाते हैं,

गरदन हमारी टेढ़ी है।

तुम्हारा झगड़ा तुम जानो,

हमारे झगड़े से छुट्टी ले ली है।

मोर ने सोचा, ‘चलूं, अब मैं बाज के पास चलूं। बाज झगड़ा निपटा देगा।’

मोर आगे बढ़ा तो रास्ते में ही बाज मिल गया।

बाज ने पूछा, "मोर भैया! कहां जा रहे हो?"

मोर ने कहा, "मोरनी खेरे के साथ चली गई है। पक्षियों की पंचायत बुलानी है। पर कोई आता ही नहीं है। बाज भैया, तुम तो आओगे न?"

बाज बोला:

हम तो बाज कहलाते हैं,

सिर हमार गंजा है।

पक्षियों की सरकार कहे,

तो मैं खेरे का सिर तोड़ दूं।

बाज की बात सुनकर मोर खुश हो गया। बाज को अपने साथ लेकर मोर, तीतर, बया, बगुला सबके पास पहुंचा। पक्षियों की पंचायत बैठी। सबने बाज को खेरे को पेश करने का हुक्म दिया। बाज ने खेरे के कान पकड़े और उसे सबके सामने हाजिर कर दिया।

सबने कहा, "खेरा भैया, इस मोर को इसकी मोरनी दे दो।"

खेरा बोला, "मैं नहीं दूंगा।"

सबने कहा, "बाज भैया, इस मोर को इसकी मोरनी दिला दो।",

बाज बोला:

मैं तो बाज कहलाता हूं,

सिर मेरा गंजा है।

मोर को मोरनी दे दो,

नहीं तो तेरा सिर फोड़ दूंगा।

यह कहकर बाज खेरे के पीछे दौड़ा।

खेरा डरकर बोला, "भैया, लो, यह मोरनी। मैं मोर को दिये देता हूं।"

मोर को मोरनी मिल गई और पक्षियों की पंचायत बिखर गई।

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